श्रीराम कथा के आठवें दिन श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला।
आगरा। तोता का ताल स्तिथ खेमेश्वर नाथ महादेव मंदिर में चल रही श्रीराम कथा के आठवें दिन श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। कथा व्यास पं गरिमा किशोरी जी ने इस दिन माता अनसूया की पावन कथा का विस्तारपूर्वक और भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने माता अनसूया की तपस्या, त्याग, और धर्म निष्ठा को अत्यंत श्रद्धा और भाव के साथ प्रस्तुत किया, जिसे सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। अपने प्रवचनों में गरिमा किशोरी जी ने सनातन धर्म की महानता को भी उजागर किया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म सहिष्णुता, सेवा और सत्य जैसे मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित है, जिसने सदियों से मानवता को सन्मार्ग दिखाया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह धर्म केवल एक पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक उच्चतम शैली है। यह सनातन परंपरा की अडिग निष्ठा और आत्मबल का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भगवान प्रेम के भूखे होते हैं। जब भगवान राम अपने भाई लक्ष्मण के साथ जगत जननी सीता मैया को ढूंढते हुए शबरी के आश्रम पहुंचते हैं तो शबरी भगवान की प्रतीक्षा में राह में फूल बिछाती हुई मिलती हैं। उनके खाने के लिए जंगल से बेर एकत्रित कर लाती है और भगवान को चख-चख कर खिलाती है। भगवान भी अपनी भक्त शबरी के झूठे बेरों को प्रेम से खाते हैं। पं गरिमा किशोरी ने श्रद्धालुओं को सनातन धर्म की मर्यादा अनुसार जीवन जीने की प्रेरणा दी और सत्य, सेवा तथा सदाचार को अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया। कथा स्थल पर भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा व्यास के प्रवचनों से प्रेरित होकर धर्म मार्ग पर चलने का संकल्प लेते दिखाई दिए। अंत में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। मुख्य रूप से सोनिया माहौर, चांदनी भोजवानी, पूनम छतानी, रानू तीर्थानी, मधु अग्रवाल, सुधा शर्मा, कीर्ति सेन, प्रीती, ओमबती राजपूत, सीमा, पदमा, सोनिया, नूतन, सरोज, रेनू राजपूत, भगवती देवी, मधु, रति माहौर आदि महिलाएं उपस्थित रही।

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