बाबीहा अमृत वेले बोलिआ तां दरि सुणी पुकार, मेघे नो फुरमानु होआ—वरसहु किरपा धारि।” सुबह भगवान से मिलने का समय है अमृत-वेला।


आगरा। पावन अमृत रस में डूबी संगत ने आज गुरुद्वारा शाहगंज एवं अमृतवेला परिवार द्वारा आयोजित गुरु नानक देव जी के प्रकाश पुरब को समर्पित दो दिवसीय नाम सिमरन समागम के समापन पर राधा कृष्ण मंदिर पार्क पांडव नगर  दूसरे दिन दिव्य अनुभूति प्राप्त की।

प्रातः 3:30 बजे से 6:00 बजे तक गुरु श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी की पवित्र हजूरी में समूची संगत नाम सिमरन में लीन होकर आत्मिक शांति एवं आनंद से झूम उठी। गुरु के दरबार में गूँज रहे "वाहिगुरु" के स्वर वातावरण को पवित्रता से भरते रहे।

समागम का शुभारंभ भाई साहिब भाई गुरशरण सिंह जी (लुधियाना) की अमृतमयी सिमरन साधना से हुआ। उनकी वाणी ने संगत को नाम से जोड़ा और अमृत-वेला संभालने का गुरमत संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अमृत-वेला वह अनमोल घड़ी है, जब प्रभु अपनी कृपा-दृष्टि सर्वाधिक बरसाते हैं।

आयोजक गुरुद्वारा शाहगंज अमृतवेला परिवार की ओर से सभी गुरु नानक नाम-लेवा संगत का हार्दिक धन्यवाद किया गया, जिन्होंने पूरे प्रेम, श्रद्धा और उत्साह के साथ समागम को सफल बनाया।

सेवा में बहनें:

अमरजीत कौर, रोशनी कुकरेजा, भूमि गनवानी, चांदनी भोजवानी, जानवी त्रिलोकानी, वर्षा करमचंदानी, रोशनी मानवानी, जानवी कुकरेजा, वर्षा धर्मानी, कविता अवतानी एवं अन्य समर्पित सेविकाएँ।

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