दिनांक 11.03.2026- रीतिकालीन साहित्य के कलात्मक उत्कृष्टता की होगी पड़ताल- (श्रीमती बी डी जैन कन्या महाविद्यालय, आगरा व हिंदुस्तानी ऐकेडमी, प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में 13 व 14 मार्च 2026 को द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन होगा।)
आगरा। दिनांक 11.03.2026-रीतिकालीन साहित्य के कलात्मक उत्कृष्टता की होगी पड़ताल-
(श्रीमती बी डी जैन कन्या महाविद्यालय, आगरा व हिंदुस्तानी ऐकेडमी, प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में 13 व 14 मार्च 2026 को द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन होगा।)
"रीतिकालीन साहित्य के विविध आयाम" विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। संगोष्ठी की संयोजिका डॉ. अंकिता तिवारी ने बताया कि रीतिकाल को हिंदी साहित्य में हमेशा उपेक्षित रखा गया है और इसे दरबारी एवं अतिशयोक्ति के खाते में शामिल कर दिया गया। इससे साहित्य के अविरल प्रवाह से निःसृत सहज प्रेम, भाव की कोमलता एवं सृजन की उत्कृष्टतम स्वरूपों आदि का तटस्थ मूल्यांकन नहीं हो सका है। सत्ता के अवसान को साहित्य का अवसान मान लिया गया और रीतिकाल को अंधकार काल घोषित कर दिया गया, जो कि अनुचित है। इन सभी बिंदुओं पर स्वस्थ मानसिकता से संवाद को आमंत्रित करने के लिए इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। प्राचार्या प्रो. वंदना अग्रवाल ने बताया कि संगोष्ठी में देश के विभिन्न प्रमुख शहरों के विद्वान एकत्रित होंगे जिससे संवाद की अनेक दिशाएं खुल सकेंगी। वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, अरुणाचल प्रदेश, दिल्ली, कुशीनगर कपिलवस्तु, ललितपुर आदि स्थानों से विद्वतजन इस संगोष्ठी में शामिल होंगे। संगोष्ठी समन्वयक प्रो. शिखा श्रीधर ने बताया कि संगोष्ठी का उद्घाटन डॉ भीमराव अम्बेडकर विवि की कुलपति प्रो. आशुरानी द्वारा किया जाएगा और द्वितीय दिवस में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी के कुलपति प्रो. नवीन चंद लोहनी की गरिमामय उपस्थिति रहेगी। संगोष्ठी की सह-संयोजिका डॉ. प्रतिमा सिंह ने बताया कि वाराणसी से प्रो. विद्योत्मा मिश्र, प्रो. उदय प्रताप सिंह, केंद्रीय हिंदी संस्थान से प्रो. उमापति दीक्षित, अरुणाचल प्रदेश से डॉ. आलोक सिंह, के एम आई के निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीधर, वृन्दावन शोध संस्थान के निदेशक डॉ. राजीव द्विवेदी, प्रयागराज से डॉ. मुदिता तिवारी, डॉ. कृपा किंजलकम, दिल्ली से डॉ. राजकुमार उपाध्याय 'मणि', कपिलवस्तु से प्रो. सत्येंद्र दुबे, लखनऊ से डॉ. बलजीत श्रीवास्तव आदि प्रमुख व्यक्तित्वों की उपस्थिति संगोष्ठी में रहेगी। डॉ. नेहा विश्वकर्मा ने बताया कि संगोष्ठी को विविध सत्रों में आयोजित किया जा रहा है जिसमें रीतिकाल का लोकवृत्त, रीतिकाल के सामाजिक-आर्थिक परिवेश, स्त्री अस्मिता के विविध स्वरों जैसे विषयों पर संगोष्ठी के सत्र में विश्लेषण एवं विवेचन होगा। डॉ. अर्चना सिंह ने संगोष्ठी के सत्र विवरण के सम्बन्ध में जानकारी दिया तथा संगोष्ठी के उपविषयों की चर्चा की। इस मौके पर मीडिया प्रभारी प्रो० नीलम कान्त, श्रीमती प्रियंका रानी, अनुपम यादव, प्रो० मीरा अग्रवाल, प्रो० अनुराधा गुप्ता, प्रो० किरण सिंह, प्रो० शुभलेश कुमारी, अमृता श्रीवास्तवा आदि प्रवक्ताएं उपस्थित रहीं।
संवाददाता धर्मेंद्र ठाकुर की रिपोर्ट आगरा...

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