पुलिस एसपीसीए के साथ या पशु क्रूरता करने वाले अपराधियों के साथ- कैस्पर्स होम संस्था के नेतृत्व में पशु प्रेमियों ने डीसीपी सिटी से मिलकर रखा अपना पक्ष, ज्ञापन सौंपकर पुलिस के सहयोग और दोषियों पर कार्यवाही की मांग
आगरा। शहर में पशु क्रूरता के मामलों में पशु प्रेमियों व पशुओं के लिए काम कर रही संस्थाओं को सहयोग के बजाय अपराधियों को संरक्षण मिल रहा है। पशुओं के लिए कार्य कर रहे लोगों के खिलाफ पुलिस रिपोर्ट तैयार कर रही है और अपराधियों को संर7ण दिया जा रहा है। निजि संस्थाओं से पालतु पशुओं के लिए इलाज का दबाव बनाया रहा है। वहीं दूसरी और स्ट्रीट एनीमल के साथ खौलता पानी फेंककर क्रूरता करने जैसे मामले सामने आए, लेकिन पुलिस संस्थाओं का सहयोग करने के बजाय अपराधियों के पक्ष में खड़ी नजर आती है। यह शियाकत आज कैस्पर्स होम की चेयरपर्सन विनीता अरोड़ा ने कलेक्ट्रेट स्थित डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास से मिलकर की। उन्होंने थाना छत्ता में फोन कर जांच का आदेश देते हुए पूरी तरह सहयोग करने का आश्वासन दिया। पशु प्रेमियों ने कहा कि इस बार सही जांच नहीं हुई तो शहर के पशु प्रेमी पशुओं के साथ कलेक्ट्रेट आकर धरना देंगे। पुलिस के सहयोग के बिना भला संस्थाएं कैसे कार्य कर सकती हैं। इस अवसर पर मुख्य रूप से विशाल सैनी, विकास अग्रवाल, शांतनु बंसल,अंकित शर्मा,सुरेखा आदि उपस्थित थे
थाना एत्माद-दौला प्रभारी ने बिना किसी जांच के आईजीआरएस पर एक बेहद गैरकानूनी रिपोर्ट तैयार की है और दोषियों का पक्ष लिया है, जबकि तथ्य यह है कि:-
1. पालतू कुत्तों की देखभाल, उपचार, टीकाकरण और पंजीकरण की जिम्मेदारी मालिकों की होती है, संस्थाओं की नहीं।
2. कोई भी सरकारी अधिकारी या सरकारी एजेंसी किसी भी गैर-सरकारी धर्मार्थ संगठन को, जो अपने निजी संसाधनों और निजी ज़मीन पर बिना किसी सरकारी सहायता के अपना धर्मार्थ कार्य चला रहा है, किसी के पालतू कुत्तों का इलाज करने के लिए अवैध रूप से बाध्य नहीं कर सकती।
3. आरोपी का कुत्ता लगातार जंग लगी जंजीर से बंधा हुआ था, जो पीसीए अधिनियम और बीएनएस कानूनों के अनुसार पशु क्रूरता है।
4. आरोपी के पास अपने पालतू जानवर के टीकाकरण और पंजीकरण का कोई रिकॉर्ड नहीं था, जो फिर से गंभीर पशु उपेक्षा और क्रूरता तथा नगर निगम कानूनों और एबीसी कानून 2023 का उल्लंघन है।
5. थाना एत्माद-दौला प्रभारी धर्मेंद्र यादव ने बेघर जानवरों के लिए हमारे धर्मार्थ कार्य के बारे में तथ्यों की जांच किए बिना हमारे एडब्ल्यूबीआई द्वारा मान्यता प्राप्त संगठन पर आरोप लगाया है और एसपीसीए के एक सम्मानित सदस्य, आगरा नगर निगम के प्रतिनिधि, मुझ जैसे व्यक्ति का अपमान किया है और मेरी पहचान की जांच किए बिना ही मुझ पर झूठा आरोप लगाया है। किसी गैर-सरकारी संगठन को अवैध रूप से इलाज करने के लिए बाध्य करना दंडनीय अपराध है। पालतू कुत्तों के मामले में, अवैध रूप से दोषी मालिकों को बिना टीकाकरण और पंजीकरण वाले पालतू कुत्तों को बेरहमी से जंजीरों में बांधने या छोड़ने की अनुमति देना अपराध है।
6. थाना प्रभारी ने एसपीसीए सदस्य द्वारा डीसीपी को शिकायत दिए जाने के बावजूद एफआईआर दर्ज न करके बेचारे कुत्ते को प्रताड़ित करने और छोड़ने के अपराध को बढ़ावा दिया।
7. थाना प्रभारी ने सार्वजनिक शौचालय जाने के दौरान पालतू कुत्ते को सड़क पर असुरक्षित छोड़ने की दोषी की झूठी कहानी का समर्थन किया और परित्याग के अपराध को कुत्ते के भाग जाने में बदल दिया (उसे जानबूझकर छोड़ा गया था, वरना एक मूर्ख भी जानता है कि पालतू कुत्ते को सड़क पर असुरक्षित नहीं छोड़ा जा सकता)।
8. नगर निगम की टीम ने परित्यक्त कुत्ते को ढूंढकर बचाया, फिर भी थाना प्रभारी नगर निगम, एडब्ल्यूबीआई द्वारा मान्यता प्राप्त संगठनों और एसपीसीए सदस्यों पर आरोप लगा रहा है, ताकि वह अपने कारणों से दोषी को बचा सके।
10. तीन पिल्लों को जिंदा जलाने वाली महिलाओं के खिलाफ लंबित एफ.आई.आर. का भी उनकी रिपोर्ट में कोई जिक्र नहीं है।
11. अगर धर्मेंद्र यादव का दावा है कि पालतू कुत्ता खुद भाग गया, तो मालिक द्वारा लापता कुत्ते की जनरल डायरी में शिकायत कहां है?
संवाददाता: धर्मेंद्र ठाकुर की रिपोर्ट आगरा...

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