बीडी जैन कॉलेज में 20 दिवसीय राज्य ललित कला अकादमी की ग्रीष्मकालीन कला कार्यशाला का भव्य समापन
मुख्य अतिथि पूरन डाबर ने 'संघर्ष से सफलता' का दिया मंत्र, छात्राओं की पेंटिंग्स भी खरीदीं
प्रदेश के हर जिले में एक साथ 75 कार्यशालाएं आयोजित कर रही है अकादमी: डॉ. आभा
आगरा। श्रीमती बी. डी. जैन कन्या महाविद्यालय में संस्कृति विभाग के अंतर्गत राज्य ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित 20 दिवसीय ग्रीष्मकालीन कला कार्यशाला का समापन समारोह अत्यंत गरिमापूर्ण माहौल में संपन्न हुआ।
अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत सरकार के डेवलपमेंट कौंसिल फॉर फुटवियर एंड लेदर इंडस्ट्री के चेयरमैन श्री पूरन डाबर रहे। विशिष्ट अतिथियों में राज्य ललित कला अकादमी की कार्यकारिणी सदस्य डॉ. आभा, संस्कार भारती के महामंत्री श्री नंद नंदन गर्ग, समाजसेवी व एबीवीपी के पूर्व सदस्य शिवम कश्यप और एबीवीपी के महामंत्री शिवांग खंडेलवाल उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की संयोजिका एवं चित्रकला विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर नीलम कान्त ने सभी अतिथियों को अंग वस्त्र और पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका आत्मीय स्वागत किया। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. वंदना अग्रवाल ने मुख्य अतिथि श्री पूरन डाबर जी को पटका, पुष्पगुच्छ और पौधा देकर सम्मानित किया। इस दौरान प्रशिक्षक सुनील जी ने डाबर जी को उनका बनाया हुआ पोर्ट्रेट और प्रो. नीलम कान्त ने छठ पर्व पर आधारित एक सुंदर चित्र भेंट किया।
छात्राओं की कलाकृतियों की सराहना और तत्काल खरीद
कार्यशाला के दौरान कुल 60 छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। संजोयिका प्रो. नीलम कान्त, प्रशिक्षक डॉ. रूपाली खन्ना और सुनील कुमार जी ने अतिथियों को कार्यशाला में तैयार किए गए प्राकृतिक चित्रण, कोलाज, स्टिल लाइफ और पोर्ट्रेट विधाओं के चित्रों का अवलोकन कराया।
मुख्य अतिथि श्री पूरन डाबर और डॉ. आभा ने छात्र-छात्राओं के हुनर की भूरि-भूरि प्रशंसा की। कला से प्रभावित होकर श्री पूरन डाबर ने तत्काल तीन छात्राओं की पेंटिंग्स उनके तय मूल्यों पर खरीद लीं, जिनमें शामिल हैं:
कृतिज्ञा सिंह राठौर: हनुमान जी का चित्रण
दिव्यांशी वर्मा: शिव-शक्ति का चित्रण
शिवानी: महात्मा बुद्ध पर आधारित चित्रण
जीवन मंत्र और आत्मनिर्भरता की सीख
अपने संबोधन में मुख्य अतिथि श्री पूरन डाबर ने युवाओं को प्रेरित करते हुए अपना जीवन मंत्र साझा किया:
"संघर्ष से सफलता और सफलता से समर्पण।"
"उत्तम खेती, मध्यम बान, निषिद्ध चाकरी, भीख समान — आत्मनिर्भरता ही समृद्ध भारत का आधार है।"
उन्होंने सभी संभ्रांत जनों और विद्यार्थियों से आत्मनिर्भर बनने और देश की समृद्धि में योगदान देने का आह्वान किया।
अकादमी की अनूठी पहल
अकादमी की कार्यकारिणी सदस्य डॉ. आभा ने सफल आयोजन के लिए महाविद्यालय की पीठ थपथपाई। उन्होंने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि राज्य ललित कला अकादमी इस वर्ष उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक साथ 75 कार्यशालाएं आयोजित कर कला को जन-जन तक पहुंचा रही है।
अंत में, कार्यक्रम संयोजिका एवं प्रशिक्षकों ने प्रशिक्षणार्थियों की लगन और मेहनत की सराहना करते हुए शानदार मंच प्रदान करने के लिए राज्य ललित कला अकादमी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
संवाददाता: धर्मेंद्र ठाकुर की रिपोर्ट आगरा....



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