स्नान पूर्णिमा 29 को, गजानन स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे श्रीजगन्नाथ जी
श्रीजगन्नाथ मंदिर द्वारा महाराजा अग्रसेन भवन लोहामंडी में 29 जून को आयोजित किया जाएगा श्रीजगन्नाथ महाभिषेक (स्नान यात्रा) महोत्सव, पंच नदियों के जल व पंचगव्य से होगा अभिषेक
बहन सुभद्रा व भाई बलराम संग गजानन स्वरूप में दर्शन देंगे भगवान जगन्नाथ, इसके उपरान्त 15 दिन तक रहेंगे मंदिर के पट बंद
आगरा। 29 जून को स्नान यात्रा (जगन्नाथ जी के प्राक्ट्योत्सव) में पंच नदियों के जल व पंचगव्य से विधि विधान के साथ भगवान जगन्नाथ का अभिषेक के साथ वैदिक मंत्रोच्चारण भी गूंजेंगे। इस मौके पर भगवान जगन्नाथ बहन सुभद्रा व भाई बलराम संग गजानन स्वरूप में दर्शन देंगे। 29 जून को श्रीजगन्नाथ मंदिर (इस्कॉन) द्वारा श्रीजगन्नाथ महाभिषेक स्नान यात्रा महोत्सव (स्नान पूर्णिमा) का आयोजन महाराजा अग्रसेन भवन, लोहामंडी में किया जाएगा। यह जानकारी इस्कॉन आगरा के अध्यक्ष अरविन्द प्रभु ने मंदिर परिसर में आयोजित आमंत्रण पत्र विमोचन कार्यक्रम में दी और शहरवासियों को स्नान पूर्णिमा महोत्सव में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।
बताया कि सनातन वैष्णव परंपरा के अनुसार स्नान पूर्णिमा के अवसर पर भगवान श्री जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा महारानी का भव्य व दिव्य महाअभिषेक सौकड़ों कलशों से कराया जाएगा। श्रद्धालुओं को भी भगवान के अभिषेक में सहभागी बनने का अवसर प्रदान किया जाएगा। मान्यता है कि महाअभिषेक के पश्चात भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ हो जाते हैं और विश्राम के लिए एकांत में चले जाते हैं। इसी परंपरा के अंतर्गत स्नान यात्रा के बाद भगवान 15 दिनों तक भक्तों को प्रत्यक्ष दर्शन नहीं देते। इस अवधि को "अनवसर" या "अनासार काल" कहा जाता है। 29 जून को सुबह मंगला आरती व राज भोग के उपरान्त श्रीजगन्नाथ भगवान शोभायात्रा मृदंग और मंजीरों संग हरि कीर्तन करते हुए महाराजा अग्रसेन भवन के लिए प्रस्थान करेगी। जहां षोड़श उपचार (16 प्रकार की सामग्री भगवान को अर्पित करने) के बाद भगवान का पंच नदियों के जल, पंचामृत, पंचगव्य व फलों के रस के 251 कलशों से अभिषेक के उपरान्त गजानन स्वरूप में भगवान का श्रंगार आकर्षक परिधान व पुष्पों से किया जाएगा।
स्नान यात्रा व रथयात्रा के संयोजक नितेश अग्रवाल व कान्ता प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि 29 जून को स्नान यात्रा सम्पन्न होने के बाद मंदिर के पट अगले 15 दिनों तक श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेंगे। इस दौरान भगवान के विग्रहों की विशेष सेवा, उपचार और श्रृंगार किया जाएगा। भक्त प्रत्यक्ष दर्शन नहीं कर सकेंगे, लेकिन मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना और सेवाएं जारी रहेंगी। 15 दिनों के पश्चात भगवान नवयौवन रूप में पुनः भक्तों को दर्शन देंगे, जिसे "नवयौवन दर्शन" कहा जाता है। इसके बाद भव्य रथ यात्रा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। अदिति गौरांगी ने बताया कि यह परंपरा भगवान और भक्त के बीच प्रेम एवं विरह की भावना को प्रकट करती है। जिस प्रकार किसी प्रियजन के कुछ समय के लिए दूर होने पर उसके पुनः दर्शन की उत्सुकता बढ़ जाती है, उसी प्रकार अनवसर काल के बाद भगवान के दर्शन का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। इस अवसर पर मुख्य रूप से विमल फतेहपुरिया, अमित बंसल, सुधीर अग्रवाल, दिनेश अग्रवाल, अनूप अग्रवाल, विकास बंसल, नवीन सिंघल, सुशील अग्रवाल, अनुज अग्रवाल, अतुल कत्याल, अंकित अग्रवाल, हर्ष खटाना, आशीष गोयल, विपिन अग्रवाल, शैलेश बंसल, राजेश उपाध्याय, राजीव मल्होत्रा, संजय कुकरैजा, रमेश यादव मौजूद रहे।
संवाददाता धर्मेंद्र ठाकुर की रिपोर्ट आगरा..

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