जन संवाद वाल्मीकि महासम्मेलन"का आगाज 25 फरवरी दिन बुधवार को जीआईसी ग्राउंड मैदान से किया गया
आगरा। जन संवाद वाल्मीकि महासम्मेलन"का आगाज 25 फरवरी दिन बुधवार को जीआईसी ग्राउंड मैदान से किया गया जिसमें वाल्मीकि समाज के हजारों लोग उपस्थित रहे जिस कार्यक्रम की अध्यक्षता वाल्मीकि महापंचायत के अध्यक्ष चौधरी मानसिंह के द्वारा की गई जिसका संचालन एडवोकेट विमल कुमार के द्वारा और उद्घाटन मनीष कोमल बाबा के कर कमलो से महर्षि भगवान वाल्मीकि जी एवं डॉ भीमराव अंबेडकर जी के चित्र पर माल्यार्पण कर की गई।
जन संवाद वाल्मिकी महासम्मेलन (सार्वजनिक संवाद वाल्मिकी सम्मेलन का
उद्देश्य वाल्मीकि समुदाय को शोषण के खिलाफ खड़े होने, अपने अधिकारों की रक्षा करने और अपनी जनसांख्यिकीय शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित करना रहा।
मंच से एक आवाज के साथ सभी वाल्मीकि समाज के लोगों ने कहा कि हमारे समाज का इतना शोषण हो रहा है, फिर भी हम अपने घरों में मूक दर्शक बनकर बैठे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले हमारे भाइयों की बहनों और बेटियों के खिलाफ अत्याचार किए जा रहे हैं और बेटों की हत्या की जा रही है।
दोस्तों, यह घिनौना शोषण इसलिए हो रहा है क्योंकि हम अपने घरों से बाहर नहीं निकलना चाहते। जिनके साथ ये घटनाएं घटित होती हैं, केवल वही रोते-बिलखते रहते हैं, और सामाजिक आंदोलनकारी/कार्यकर्ता अपनी क्षमता के अनुसार कार्य करते हैं, जिनकी शक्ति प्रशासन पर काम नहीं करती। दोस्तों, हमें हर दिन अपने घरों से निकलकर अपनी इज्जत की लड़ाई लड़नी होगी। हमें गांव में शोषण का शिकार होने वाले हर एक व्यक्ति को सुरक्षित करना होगा। हमारे साथ हो रहे शोषण का दूसरा कारण यह है कि हमारी जनसंख्या की गिनती सरकार के ध्यान में नहीं आती है। क्योंकि जिस भी गाँव में हमारा शोषण होता है, राज्य या देश की सरकार पूछती है कि गाँव में पीड़ित जाति की जनसंख्या कितनी है, तो प्रशासन का जवाब होता है कि पूरे गाँव में उनके केवल चार घर हैं और शोषक के 100 घर हैं, इसलिए सरकार 10 वोटों के लिए 500 मतदाताओं को नाराज नहीं करना चाहती।
लेकिन जब हम देखते हैं कि हमारे गांव की आबादी 10 है, लेकिन जब तक हम विधानसभा पहुंचते हैं, यह 10 से 15 हजार हो जाती है, और लोकसभा तक पहुंचते-पहुंचते यह संख्या लाखों में पहुंच जाती है, जिस पर हमारे नेताओं ने आज तक ध्यान नहीं दिया है। अब हमें अपनी कमजोरियों पर नहीं, अपनी ताकत पर काम करना होगा। हमें वहीं रुकना होगा जहां हम लाखों की संख्या में दिखाई देते हैं। इसलिए हमें एक ही स्वर में बोलना होगा कि जितनी हमारी जनसंख्या होगी उतनी ही हमारी राजनीति में भी हिस्सेदारी होनी चाहिए मंच से एक आवाज में बुद्धिजीवी लोगों ने कहा कि मिशन तीन चीजों पर चलता है शरीर, मन और धन
मंच पर बैठे मंचासीनो ने समाज के सभी लोगों से निवेदन करते हुए कहा कि गांवों और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले अपने सभी मित्रों से निवेदन करता हूं कि शहर का एक व्यक्ति आपके साथ हो रहे हर प्रकार के शोषण के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से केवल दो-तीन प्रतिशत लोग ही अपने घरों से बाहर निकले हैं, जबकि शोषण 100% ग्रामीण लोगों के साथ होता है। अगर आप यह सब जानते हुए भी अपने घर-बार छोड़ देते हैं, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। इसलिए हमें अपनी ताकत दिखाने के लिए, अपनी जनसंख्या की ताकत दिखाने के लिए एकजुट होना अति आवश्यक होगा जन संवाद महासम्मेलन कार्यक्रम में मुख्य रूप से विजेंद्र चौधरी बच्चू प्रधान पवन चौधरी श्रीकांत चौहान रोहित नरवार लता वाल्मीकि महावीर मनसुख संतोष डागौर बसंत वाल्मीकि वरुण देशभक्त राजकुमार रज्जो चक्रवर्ती पप्पू चौधरी भुल्ले नरवार नितिन अंबेडकर आदि लोग मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
संवाददाता: धर्मेंद्र ठाकुर की रिपोर्ट....



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