आगरा में भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ चातुर्मास मंगल कलश स्थापना एवं गुरु पूर्णिमा महोत्सव

महाराजा अग्रसेन भवन, लोहामंडी (जयपुर हाउस) में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़


आचार्य श्री सौभाग्यसागर जी महाराज ससंघ एवं स्थविर संत श्री सुरत्न सागराचार्य जी महाराज का मिला पावन सानिध्य

आगरा। मरसलगंज गौरव आचार्य श्री सौभाग्यसागर जी महाराज ससंघ एवं स्थविर संत श्री सुरत्न सागराचार्य जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में बुधवार को महाराजा अग्रसेन भवन, लोहामंडी (जयपुर हाउस) में चातुर्मास मंगल कलश स्थापना एवं गुरु पूर्णिमा महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस भव्य आयोजन में आगरा सहित आसपास के क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुपम वातावरण बना रहा।

​विशाल शोभायात्रा के साथ हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, टीचर्स कॉलोनी से निकाली गई एक विशाल शोभायात्रा के साथ हुआ। भक्तों द्वारा आचार्यश्री ससंघ के सानिध्य में निकाली गई यह शोभायात्रा महाराजा अग्रसेन भवन, लोहामंडी पहुँची, जहाँ इसका भव्य स्वागत किया गया। भवन में पहुँचकर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मंगलाचरण के साथ हुआ।

​इसके पश्चात अतिथियों एवं समिति पदाधिकारियों द्वारा समाधि सम्राट आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण तथा दीप प्रज्वलन किया गया। समिति की ओर से आचार्यश्री ससंघ के समक्ष श्रीफल भेंट किया गया, और श्रद्धालुओं ने जयघोषों के बीच अपने आराध्य गुरुओं के प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त की।

​वैदिक एवं जैनाचार्य परंपरा के बीच हुई कलश स्थापना

वैदिक एवं जैनाचार्य परंपरा के मंगल मंत्रों के पावन उच्चारण के बीच चयनित सौभाग्यशाली परिवारों द्वारा चातुर्मास मंगल कलश स्थापित कर पुण्य लाभ प्राप्त किया गया। मंत्रोच्चार, मंगल ध्वनि और भक्तिमय वातावरण के मध्य विधि-विधान से हुए इस अनुष्ठान ने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। इस दौरान पूरे सभागार में "जय जिनेंद्र" और गुरु वंदना के जयघोष निरंतर गूंजते रहे।

​चातुर्मास आत्मशुद्धि और संयम का पर्व: आचार्य श्री सौभाग्यसागर जी महाराज

धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री सौभाग्यसागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि "चातुर्मास आत्मशुद्धि, संयम, साधना और धर्म आराधना का अनुपम पर्व है।" वर्षा ऋतु में संतों का एक स्थान पर विराजमान होना केवल परंपरा नहीं, बल्कि समाज के नैतिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक उत्थान का माध्यम है। उन्होंने कहा कि चातुर्मास के दौरान प्रत्येक व्यक्ति को क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे आंतरिक विकारों का त्याग कर स्वाध्याय, तप, त्याग, सेवा, दया और अहिंसा के मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए। गुरु का सानिध्य जीवन को नई दिशा देता है और धर्म के संस्कार व्यक्ति को श्रेष्ठ नागरिक बनाते हैं।

​श्रद्धालुओं ने किया गुरु पूजन

गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं ने अष्ट द्रव्यों की थाल सजाकर संगीतमय वातावरण में आचार्यश्री सौभाग्यसागर जी महाराज का गुरु पूजन किया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

​इनका रहा विशेष योगदान

आयोजन के सफल संचालन में श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर समिति एवं तपस्वी सम्राट वर्षायोग समिति, जयपुर हाउस के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं ने आगामी चार माह तक चलने वाले 'तपस्वी सम्राट वर्षायोग-2026' के विविध धार्मिक आयोजनों में अधिकाधिक संख्या में सहभागिता का संकल्प लिया।

​इस अवसर पर अध्यक्ष राकेश जैन पर्देवाले, मंत्री दीपक जैन, सुबोध जैन, रवि जैन, मनोज जैन, बॉबी जैन, अमित सेठिया, राहुल जैन, मीडिया प्रभारी शुभम जैन सहित समस्त शांतिनाथ युवा मंडल, शांतिनाथ महिला मंडल एवं स्वास्तिक महिला मंडल के सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद रहे।


 संवाददाता धर्मेंद्र ठाकुर की रिपोर्ट आगरा....

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