थाना न्यू आगरा के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने पर पशु प्रेमियों में नाराजगी

पसु प्रेमियों ने कलेक्ट्रेक्ट जाकर जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन, जिलाधिकारी ने दिया सहयोग का आश्वासन,  

आगरा। 28 अगस्त को थाना न्यू आगरा ने पुष्पांजलि बाग सोसाइटी के डॉग फीडर्स (कुत्तों को खाना खिलाने वालों) को जबरदस्ती एक लिखित समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया कि वे सोसाइटी परिसर के अंदर कम्युनिटी डॉग्स को कभी खाना नहीं खिलाएंगे। गैर-कानूनी और पुलिस के अधिकार क्षेत्र से बाहर होने के साथ यह कार्य सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन (आर्टिकल 21 और 51A(g) के तहत कुत्तों को भोजन का अधिकार है और नागरिकों को उन्हें खाना खिलाने का अधिकार है) भी है। एसपीसीए के बैनर तले आज एसपीसीए की सदस्य व कैस्पर्स होम की संचालिका विनीता अरोरा वह पशु प्रेमियों ने जिलाधिकारी मनीष बंसल को इस सम्बंध में ज्ञापन सौंपा और अपनी समस्याओं को रखा। 

कहा कि एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियम, 2023 का उल्लंघन: PCA एक्ट, 1960 के तहत नोटिफाई किए गए ABC नियम 2023 (नियम 7, 8, 20) के अनुसार - कुत्ते के काटने, खाना खिलाने की जगह (फीडिंग पॉइंट्स) तय करने, खाना खिलाने से जुड़े विवादों को सुलझाने, नसबंदी, टीकाकरण और कुत्तों को दूसरी जगह ले जाने से जुड़े सभी मामले स्थानीय प्राधिकरण यानी आगरा नगर निगम के विशेष कानूनी अधिकार क्षेत्र में आते हैं, न कि पुलिस के। नियम 20 साफ कहता है कि RWA को फीडर्स से सलाह करके खाना खिलाने की जगहें तय करनी चाहिए।

पुलिस का काम सिर्फ फीडर्स की सुरक्षा करना और क्रूरता/परेशानी करने वाले लोगों के खिलाफ PCA एक्ट, 1960 और BNS के तहत FIR दर्ज करना है; न कि कुत्तों को हटाना, फीडिंग पॉइंट्स हटाना या फीडर्स को कानून तोड़ने के लिए मजबूर करना। इसलिए, पुलिस के दबाव में किया गया वह समझौता कानून की नज़र में अमान्य और शून्य है। SPCA सदस्य आचार्य विनोद गर्ग जी ने SPCA कमेटी का परिचय कराने के लिए एक संयुक्त बैठक की मांग भी की, ताकि पशु क्रूरता के मामलों से निपटने में हमें कोई समस्या न हो। इस अवसर पर मुख्य रूप से संजय मल्होत्रा सारिका तिवारी रुद्रांश तिवारी आदि उपस्थित थे। 




पुलिस के लिए एडवाइजरी नोट  

विषय: कम्युनिटी डॉग्स को खाना खिलाने और कुत्ते के काटने के मामलों में पुलिस की भूमिका और क्षेत्राधिकार के संबंध में

1. क्षेत्राधिकार - JURISDICTION

कानून के अनुसार गली के कुत्तों का प्रबंधन नगर निगम/नगर पालिका का काम है, पुलिस का नहीं।  

पुलिस को कुत्तों को हटाने, दूसरी जगह छोड़ने या खाना खिलाने पर रोक लगाने का कोई अधिकार नहीं है।


2. कुत्तों को खाना खिलाना कानूनी है

3. पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023, नियम 20: हर नागरिक को गली के जानवरों को खाना खिलाने का अधिकार है। कोई भी रोक नहीं लगा सकता। RWA (आवासीय कालोनियां) जुर्माना/पाबंदी नहीं लगा सकती।

4. माननीय सर्वोच्च न्यायालय: AWBI बनाम PEST केस में SC ने कहा - "पकड़ो, नसबंदी करो, टीका लगाओ, उसी जगह छोड़ दो"। खाना खिलाना इसी का हिस्सा है।  

पुलिस की भूमिका: फीडर्स के खिलाफ शिकायत दर्ज न करें। अगर झगड़ा हो तो सिर्फ शांति भंग रोकने के लिए बीच-बचाव करें।


3. कुत्ते के काटने के मामले

4. नगर निगम का काम: कुत्ते पकड़ना, नसबंदी, टीकाकरण और काटने के बाद इलाज नगर निगम का दायित्व है - यू.पी. नगरपालिका अधिनियम धारा 431 + ABC नियम 2023।

5. पुलिस की भूमिका: पुलिस पहली एजेंसी नहीं है। पीड़ित को नगर निगम/स्वास्थ्य विभाग के पास भेजें।  

पुलिस कब FIR करे: सिर्फ तब जब जानवर पर क्रूरता u/s 11 PCA Act हो या इंसान को गंभीर चोट u/s BNS हो। आम काटने का केस = नगर निगम को रेफर करें।


4. पुलिस कब कार्रवाई करे

पुलिस को सिर्फ इन मामलों में हस्तक्षेप करना है:

1. जानवरों पर क्रूरता: पीटना, जहर देना, मारना - BNS धारा 325 + PCA Act धारा 11। FIR दर्ज करें।

2. फीडर्स को परेशान करना: धमकी, मारपीट, गाली, अवैध जुर्माना - BNS धारा 115, 352 + ABC नियम 20(4)। FIR दर्ज करें।

3. गुंडागर्दी/शांति भंग: अगर भीड़ फीडर को घेर रही है या मार रही है तो कानून व्यवस्था बनाएं और FIR करें।


5. पुलिस क्या न करे

6. फीडर्स से जबरन "समझौता पत्र" या "खाना न खिलाने का शपथ पत्र" न लिखवाएं। यह अवैध है।

7. सोसाइटी से कुत्तों को हटाने का आदेश न दें। यह ABC नियम 2023, नियम 7(6) का उल्लंघन है।

8. फीडर्स को डराएं-धमकाएं नहीं। यह सत्ता का दुरुपयोग है।

प्रार्थना

अनुरोध है कि सभी कर्मचारियों को निर्देशित किया जाए कि:

1. खाना खिलाने और कुत्ते काटने की शिकायत नगर निगम को भेजी जाए और DDR में दर्ज हो।

2. क्रूरता और फीडर उत्पीड़न में FIR दर्ज की जाए।

3. फीडर्स को परेशान न किया जाए क्योंकि वे संविधान के अनुच्छेद 51A(g) और ABC नियम 2023 के तहत कर्तव्य निभा रहे हैं।


 संवाददाता धर्मेंद्र ठाकुर की रिपोर्ट आगरा...

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