कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन, जर्जर सिंधी मंदिर का भवन भरभराकर गिरा
ताजगंज थाने के सामने हादसा, कई वाहन मलबे में दबकर क्षतिग्रस्त; गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई
आगरा। ताजगंज थाने के सामने स्थित सिंधी मंदिर का जर्जर भवन बुधवार को बारिश के दौरान अचानक भरभराकर गिर पड़ा। भवन के मलबे की चपेट में आने से वहां खड़ी कई गाड़ियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। गनीमत रही कि हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। लोगों का कहना है कि यदि हादसे के समय आसपास लोग मौजूद होते तो बड़ा हादसा हो सकता था।
सिंधी समाज के लोगों के अनुसार मंदिर का भवन लंबे समय से जर्जर हालत में था। इसकी स्थिति को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया। समाज के प्रतिनिधियों ने कमिश्नर से लेकर नगर निगम के अधिकारियों तक मुलाकात कर भवन की मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण की अनुमति देने की मांग की, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिला।
आखिर किसका इंतजार कर रहा था प्रशासन?
बार-बार सूचना दिए जाने के बावजूद समय रहते जर्जर भवन को सुरक्षित कराने अथवा आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई। बुधवार की बारिश में भवन गिरने के बाद मलबे में कई वाहन दबकर क्षतिग्रस्त हो गए। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सिंधी समाज और क्षेत्रीय लोगों ने सवाल उठाया कि जब प्रशासन को पहले से पता था कि इमारत जर्जर है और कभी भी गिर सकती है, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे और जनहानि का इंतजार कर रहा था?
जनहानि होती तो जिम्मेदार कौन होता?
लोगों ने कहा कि यह हादसा प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है। आज गनीमत रही कि किसी की जान नहीं गई, लेकिन यदि मलबे की चपेट में कोई व्यक्ति आ जाता तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। समाज ने मांग की है कि घटना की जांच कराई जाए और शहर की अन्य जर्जर इमारतों का भी तत्काल सर्वे कराया जाए।
राकेश अग्रवाल, व्यापारी नेता ने कहा—
“जर्जर भवन को लेकर पूर्व में भी कई बार प्रशासन को सूचनाएं दी गईं और अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराया गया। इसके बावजूद समय रहते कार्रवाई नहीं हुई। लगता है प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। अब तो प्रशासन को जागकर तत्काल कदम उठाने चाहिए।”
श्याम भोजवानी, समाजसेवी ने कहा—
“सिंधी मंदिर की जर्जर हालत की जानकारी प्रशासन को पहले से थी। हम लोगों ने कई बार अधिकारियों को अवगत कराया और समाधान की मांग की, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं हुआ। आज भवन गिर गया और कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। शुक्र है कि कोई जनहानि नहीं हुई। प्रशासन अब भी नहीं जागा तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।”
समाजसेवियों ने जताई चिंता
शंकर लाल आसवानी, हरीश मोटवानी, विजय मोटवानी, मनीष लालवानी, किशोर मोटवानी, भरत लालवानी सहित समाज के लोगों ने प्रशासन से जर्जर भवन की घटना की जांच, क्षतिग्रस्त वाहनों का आकलन तथा पूर्व में दी गई शिकायतों पर हुई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
समाजसेवियों और क्षेत्रीय लोगों ने कहा कि जर्जर इमारतों के मामले में अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समय रहते ठोस कार्रवाई जरूरी है। यह घटना भविष्य के बड़े हादसे को रोकने के लिए प्रशासन के लिए आखिरी चेतावनी साबित होनी चाहिए।
संवाददाता धर्मेंद्र ठाकुर की रिपोर्ट आगरा...


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