श्री मनःकामेश्वर रामलीला: “देखि रूप लोचन ललचाने, हरषे जनु निज निधि पहिचाने”

पुष्प वाटिका में श्रीराम-सिया के प्रथम मिलन का मनोहारी मंचन, धनुष की टंकार से पहले नयनों ने रचा प्रेम का संवाद


विश्वामित्र संग वन गमन, ताड़का वध और यज्ञ रक्षा के प्रसंगों ने भी बांधा समां, गुरुवार को होगा धनुष यज्ञ लीला का मंचन


आगरा। देखि रूप लोचन ललचाने। हरषे जनु निज निधि पहिचाने॥ श्रीरामचरितमानस की इन चौपाइयों के भावों के अनुरूप पुष्प वाटिका में प्रभु श्रीराम और जनकनंदिनी सीता के प्रथम दर्शन का अनुपम प्रसंग श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव 2026 में श्रद्धा और सौंदर्य के साथ मंचित किया गया। श्री मनःकामेश्वर ग्रामीण संस्थान, गढ़ी ईश्वरा, दिगनेर, शमशाबाद रोड पर आयोजित रामलीला में पुष्प वाटिका का दृश्य प्रेम, लज्जा, मर्यादा और भक्ति के अनूठे संगम के रूप में उभरा। एक ओर गिरिजा पूजन के लिए पुष्प चुनने पहुंचीं माता सीता अपनी सखियों के साथ वाटिका में आईं, तो दूसरी ओर गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से पुष्प लेने पहुंचे प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण की दृष्टि जनकनंदिनी पर पड़ी। दोनों के प्रथम दर्शन का प्रसंग दर्शकों को भावविभोर कर गया।

पुष्प वाटिका की मनोहारी सज्जा, सखियों के संवाद और श्रीराम-सिया के सहज, मर्यादित भावों ने मंच पर मिथिला की दिव्यता साकार कर दी। यह प्रसंग रामकथा के उन अलौकिक क्षणों में से है, जहां प्रेम की अभिव्यक्ति शब्दों से नहीं, बल्कि नयनों के संवाद से होती है। दर्शक इस दृश्य में प्रेम की पवित्रता और मर्यादा की सुंदरता को निहारते रहे।

महोत्सव की लीला श्रृंखला में ऋषि विश्वामित्र के अयोध्या आगमन से लेकर प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण के वन गमन, राक्षसों के वध तथा जनकपुर प्रवेश के साथ पुष्प वाटिका तक के प्रसंग प्रस्तुत किए गए। महर्षि विश्वामित्र महाराज दशरथ से यज्ञ की रक्षा के लिए श्रीराम को अपने साथ ले जाने का आग्रह करते हैं। गुरु वशिष्ठ के समझाने पर महाराज दशरथ दोनों राजकुमारों को महर्षि के साथ भेजने की अनुमति देते हैं।

वन में पहुंचकर प्रभु श्रीराम ताड़का के आतंक का अंत करते हैं और महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा का दायित्व निभाते हैं। यज्ञ में विघ्न डालने वाले राक्षसों के विरुद्ध श्रीराम और लक्ष्मण के पराक्रम का मंचन भी किया गया। खर-दूषण सहित राक्षसी शक्तियों के अंत के प्रसंगों ने दर्शकों में वीररस का संचार किया। इसके बाद जनकपुर में प्रवेश और पुष्प वाटिका में श्रीराम-सिया के प्रथम दर्शन के साथ कथा ने प्रेम और भक्ति का मनोहारी रूप प्रस्तुत किया।

श्री मनःकामेश्वर मठ के श्री महंत योगेश पुरी ने कहा कि ऋषि विश्वामित्र के साथ वन गमन और यज्ञ की रक्षा के प्रसंग गुरु के प्रति सम्मान, आज्ञापालन और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देते हैं, वहीं पुष्प वाटिका का प्रसंग प्रेम की पवित्रता, विनम्रता और मर्यादित आचरण का अनुपम उदाहरण है।

मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव में गुरुवार को धनुष यज्ञ लीला का मंचन किया जाएगा। जनकपुर में आयोजित सीता स्वयंवर के इस महत्वपूर्ण प्रसंग में देश-विदेश से आए राजा-महाराजाओं के सामने भगवान शिव के विशाल धनुष को उठाने और प्रत्यंचा चढ़ाने की चुनौती होगी।

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